Thursday, January 6, 2011

प्रवाह....एक ज़ख़्मी सच
पंचभूत-वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी और आकाश - ये पाँचों थत्व अपने आप में विशिष्ठतापूर्वक है | फिर भी वायु और जल इस ब्रह्माण्ड की प्राणियों का प्रथम आधार है...आहार भी|
मनुष्य की सृष्टि से पहले ही पाँचों तत्व पस्थित थे और दुनिया के विनाश के बाद भी सदैव रहेंगे| इन शक्तियों पर निर्भर होने के बावजूद मनुष्य अपने छटे ज्ञान की शक्ति का उल्लंगन करता है| उलटी सोच का नतीजा ... जल अब जलन बनगया है - यानि की बनादिया गया है| जल अभी एक समस्या नहीं एक मुददा है| कुछ वर्गों के लिए राजनीतिक नारा है| मनुष्य पृथ्वी और जल को अपनी कब्ज़े में कैद करने का सपना देख रहा है|
भयानक कल के लिए तैयार रहिये | हमारे चारों तरफ जल का साया भी नहीं मिलेगा; अगर हम अभी से सही कदम नहीं लिए तो | जल का प्रयोग या उपयोग उसके महत्व को मन में रखकर करना ही अर्थपूर्ण है | जल के बारे में हमारे अन्धविश्वास और गलतफहमियों को जड़ से मिटाना अनिवार्य है| माना ज़मीन में जल कम... लेकिन गाड़ियों में और बोत्त्लों में कैसे ? क्या हम ज़मीन की जल से खफा है...या फिर पैसे की पानी पर प्यार ज़्यादा हो गया ?
जल प्रवाह की विशेषता ऐसी है - कभी एक नन्हे बच्चे के लुदकते कदम की तरह, कभी खूबसुरत नर्तकी की तरह, कभी एक कविता की तरह, कभी विशाल राक्षस की तरह.... कभी ख़ामोशी से, कभी शांति से, कभी चतुराई से, कभी नादानी से, कभी रहस्यपूर्ण वातावरण पैदा करके ..... ऐसे कई गुणवत्तावों का मिसाल बन के रह रहे जल को खुद्कर्ज़ नियत के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए |
भले ही जल बेरंग हो लेकिन साफ़, स्वच्छ और निष्कलंक है | ऐसे पवित्र जल को गन्दा करके काला और मेला करें | हिंसात्मक मतभेदों से लाल करें ....क्योंकि अन्य प्राणियों का भी जल आहार और आधार है | उन प्राणियों का हक़ छीन्ने का हमें कोई अधिकार नहीं है |
... अर्थ (Earth) को अनर्थ (Unearth) बनाने की कोशिश करेंगे...तो हमारा अंत तुरंत |
हम जल से जीवित है... की जल हम से


…. गुणा ....

1 comments:

alpha said...

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